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भड़ल्या नवमी राजस्थान मे भड़ल्या नवमी मुहूर्त पर हुई कई विवाहो मे माला पहनाने की रस्म से पहले हुई मास्क पहनाने की रस्म

भड़ल्या नवमी

उदयपुरभडल्या नवमी के अबूझ मुहूर्त पर शहरभर में काफी शादियां हुई। 50 व्यक्तियों की अनुमति के प्रशासनिक आदेशों के बावजूद कई शादियों में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना नहीं की गई। जश्न में डूबे बाराती समारोह के दौरान मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना भूल गए। ( भड़ल्या नवमी )

हालांकि शादी में बैंड-बाजे वाले जरूर सोशल डिस्टेंस और मास्क पहनकर नियमों की पालना करते दिखाई दिए। वहीं कई जगह पर वरमाला से पहले मास्क पहनाने की रस्म हुई। ज्योतिषविदों के अनुसार शादी का अंतिम मुहूर्त देव शयनी एकादशी को होगा। अगले सावे 5 महीने बाद दीवाली से लेकर देवउठनी एकादशी तक होंगे।( भड़ल्या नवमी )भड़ल्या नवमी

कब-कब पड़ते हैं अबूझ सावे

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, एक वर्ष में निम्न अबूझ मुहूर्त होते हैं।

बसंत पंचमी, फुलेरदोज (फाल्गुन पक्ष की शुक्ल पक्ष की द्वितीया), रामनवमी, जानकी नवमी, पीपल पूर्णिमा (वैशाख मास की पूर्णिमा), गंगा दशमी (ज्येष्ठ मास की शुक्ल दशमी) भडल्या नवमी (आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की नवमी)।( भड़ल्या नवमी )

दो दिन बाद सो जाते हैं देवी-देवता
भढली नवमी के दो दिन बाद देवशयनी एकादशी से चातुर्मास लग जाता है, जिसका अर्थ होता है कि भढली नवमी के बाद 4 माह तक विवाह या अन्य शुभ-मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। ( भड़ल्या नवमी )

धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में सभी देवी-देवता निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद सीधे देवउठनी एकादशी पर नारायण भगवान (विष्णुजी) के जागने पर चातुर्मास समाप्त होता है और फिर सभी तरह के शुभ कार्य शुरू किए जाते हैं।( भड़ल्या नवमी )भड़ल्या नवमी

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Written by priyanka singh

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