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बिना आवेदन मांगे ही रिटायर्ड अधिकारी को एक ही दिन में दे दी गई नियुक्ति

बिना आवेदन मांगे ही रिटायर्ड

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंजूरी लिए बिना ही राजस्थान में एक सेवानिवृत अधिकारी को आवेदन करने के साथ ही नियुक्ति देने के मामले में हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए प्रदेश के स्वायत्त शासन व विधि मंत्री शांति( बिना आवेदन मांगे ही रिटायर्ड अधिकारी को एक ही दिन में दे दी गई नियुक्ति) धारीवाल, स्वायत्त शासन विभाग के प्रमुख सचिव, स्थानीय निकाय निदेशक एवं जयपुर नगर निगम के आयुक्त सहित नियुक्ति पाने वाले अधिकारी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।( बिना आवेदन मांगे ही रिटायर्ड अधिकारी को एक ही दिन में दे दी गई नियुक्ति)

मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत माहंती की खंडपीठ ने गणेश चतुर्वेदी की जनहित याचिका पर यह नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया है कि राज्य प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत अधिकारी महावीर प्रसाद स्वामी ने 5 अगस्त, 2019 को स्वायत्त शासन विभाग में विधि सलाहकार की नियुक्ति के लिए आवेदन किया था।

धारीवाल ने उसी दिन विधि मंत्री के रूप में स्वामी की नियुक्ति को मंजूरी दे दी। इसके अगले दिन 6 अगस्त को विभाग ने महावीर प्रसाद स्वामी के नियुक्ति के आदेश भी जारी कर दिए। याचिका में स्वामी की नियुक्ति को नियम विरुद्ध बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की गई है।( बिना आवेदन मांगे ही रिटायर्ड अधिकारी को एक ही दिन में दे दी गई नियुक्ति)

याचिकाकर्ता के वकील सुनील समदड़िया ने बताया कि पहले तो महावीर प्रसाद स्वामी के आवेदन पर एक ही दिन में कार्रवाई करते हुए उन्हें स्वायत्त शासन विभाग में विधि सलाहकार के रूप में नियुक्ति दे दी गई । उन्हें प्रतिमाह 50 हजा़र रुपए वेतन भी दिया जा रहा है।

उनकी नियुक्ति के 1 माह के भीतर ही उन्हें 30 अगस्त, 2019 को जयपुर नगर निगम में विधि निदेशक के पद का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंप दिया गया । यह पूरी तरह से मनमाना और नियम विरुद्ध कृत्य है।

याचिका में महावीर प्रसाद स्वामी की नियुक्ति को चुनौती देने का आधार राजस्थान सिविल सर्विस पेंशन नियम-1926 को बनाया गया है । नियम-151 और 164-ए के अनुसार स्थायी पद पर 65 साल से अधिक आयु वाले व्यक्ति की फिर से नियुक्ति नहीं की जा सकती है । ( बिना आवेदन मांगे ही रिटायर्ड अधिकारी को एक ही दिन में दे दी गई नियुक्ति)

महावीर प्रसाद स्वामी जुलाई 2018 में ही 66 साल के हो गए थे। उनकी नियुक्ति के मामले में मुख्यमंत्री के स्तर पर भी कोई मंजूरी नहीं ली गई है, जबकि प्रशासनिक सुधार विभाग के 31 मई, 2019 के आदेश के अनुसार राज्य सरकार के किसी भी विभाग में कंसलटेंट की नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री की अनुमति आवश्यक है।

स्वामी की नियुक्ति से पहले विधि सलाहकार की नियुक्ति के लिए कोई आवदेन भी नहीं मांगे गए और न ही किसी तरह की कोई प्रक्रिया अपनाई गई । ( बिना आवेदन मांगे ही रिटायर्ड अधिकारी को एक ही दिन में दे दी गई नियुक्ति)

( बिना आवेदन मांगे ही रिटायर्ड अधिकारी को एक ही दिन में दे दी गई नियुक्ति)

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Written by priyanka singh

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