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महामारी को खेल समझ रहे अस्पताल / रिपोर्ट के लिए 3 दिन अस्पताल के चक्कर काटता रहा कोरोना पॉजिटिव, मेडिकल कॉलेज से पता चला मरीज को पुलिस ढूंढ रही है

महामारी को खेल समझ रहे अस्पताल

·         कोटा के एमबीएस अस्पताल में दिया था सैंपल, तीन दिनों तक नहीं दी गई रिपोर्ट( महामारी को खेल समझ रहे अस्पताल )

·         आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है अस्पतालों की लापरवाही का परिणाम

कोटा – कोरोना महामारी से पूरी दुनिया परेशान है। हल्के लक्षण नजर आने पर भी लोग फौरन टेस्ट कराने पहुंच रहे हैं। इस बीच कुछ अस्पतालों की गंभीर लापरवाही भी सामने आ रही है, जिसका खामियाजा लोगों को उठाना पड़ रहा है।

ऐसा ही एक वाकया राजस्थान के कोटा में सामने आया। यहां मान सिंह फार्म नई बस्ती सोगरिया इलाके के एक 35 वर्षीय युवक में कोरोना के लक्षण दिखे। वह फौरन कोटा के एमबीएस अस्पताल सैंपल देने पहुंचा। सैंपल देने का बाद वह तीन दिनों तक अस्पताल के चक्कर काटता रहा, लेकिन उसे यह कहकर हर बार टाल दिया गया कि अभी रिपोर्ट नहीं आई है।( महामारी को खेल समझ रहे अस्पताल )

तीसरे दिन भी युवक एमबीएस अस्पताल पहुंचा तो नर्स ने उससे रिपोर्ट न आने की बात कही। युवक के बार-बार रिपोर्ट मांगने पर नर्स ने उसे मेडिकल कॉलेज जाकर रिपोर्ट पता करने को कहा। मेडिकल कॉलेज में पता करने पर युवक को पता चला कि उसकी रिपोर्ट दो दिन पहले ही आ चुकी है, और वह कोरोना पॉजिटिव है। इतना ही नहीं उसका फोन न लगने के कारण पिछले दो दिनों से पुलिस उसकी तलाश कर रही है।

अस्पताल की लापवाही के कारण नहीं मिली रिपोर्ट

युवक ने बताया कि रिपाेर्ट में उसके माेबाइल नंबर का आखिरी अंक गलत लिखा हुआ है। इस कारण ही उससे संपर्क नहीं हो पा रहा था। युवक ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने सैंपल देते वक्त अपना आधार कार्ड भी दिया था। युवक ने बताया कि रिपोर्ट लेने के लिए वह अधीक्षक कार्यालय भी गया था, लेकिन उसे टालमटाेल कर वापस भेज दिया गया। ( महामारी को खेल समझ रहे अस्पताल )

2 दिन सर्विस सेंटर पर काम करता रहा पाॅजिटिव युवक : एमबीएस हाॅस्पिटल की इस लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि रिपाेर्ट पाॅजिटिव आने के बाद भी कोरोना पॉजिटिव युवक दाे दिन तक अपने कार्य स्थल पर नाैकरी करता रहा। यह युवक वल्लभनगर स्थित सैमसंग के सर्विस सेंटर में जाॅब करता है।

वह शुक्रवार काे भी काम पर गया था। उसने खुद बताया कि इन दिनाें कस्टमर यूं ताे कम आ रहे हैं, लेकिन कुछ कस्टमर मेरे संपर्क में आए। वहीं हमारे शाेरूम के ऑनर व अन्य सहकर्मी वहीं रहते हैं। मेरा माेबाइल 24 घंटे ऑन रहता है, क्याेंकि हमारी कंपनी की गाइडलाइन है। इन्हाेंने नंबर ही गलत लिखे ताे मैं क्या कर सकता हूं।
( महामारी को खेल समझ रहे अस्पताल )
मरीज ने लिखवाया गलत नंबर

मरीज कुछ भी कह सकता है, उसने खुद जाे नंबर लिखाए, वही ताे लिखेंगे। जानबूझकर काैन गलत नंबर लिखेगा। वह राेजाना यहां रिपाेर्ट लेने आने की बात कह रहा , जाे गलत है। ऐसा नहीं हाे सकता, क्याेंकि उसकी रिपाेर्ट ताे अगले दिन ही पाॅजिटिव आ गई थी। ( महामारी को खेल समझ रहे अस्पताल )

( महामारी को खेल समझ रहे अस्पताल )

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Written by priyanka singh

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